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Rudra is in the process of upasna of Devi’s forms of MahaVidhyas (Great Knowledge) and their different facets of the wisdom areas of the universe and humans, macrocosm and microcosm respectively. He regards himself life time learner, truth seeker and potential contributor to the universe. He aspire to spread the great knowledge of his Guru Parampara and Gurumandal. He also loves to read on wisdom, spiritual, Hinduism (Sanatan Dharma) especially Tantra and trans-national issues affecting public life. He is Shri Vidya Upasak-Shakta (Shakti worshipper).

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सहस्रनाम और रहस्य (Sahasranama and Rahasyas)

सहस्रनाम और रहस्य (Sahasranama and Rahasyas) श्री ललिता सहस्रनाम में-“अक्षरों” के साथ एक अद्भुत जादूगरी की गयी है। श्लोक लिखने की पद्धतिया होती है वह एक प्रकार के लेखन शैली का अनुशरण करती है जैसे गायत्री (24 अक्षर), उशनिक (28), अनुष्टुप (32), बृहथी (36), पंक्ति (40), त्रिष्टुप (44), और जगथी (48) । अधिकांश प्रसिद्ध कार्यों … Continue reading सहस्रनाम और रहस्य (Sahasranama and Rahasyas)

शरभावतार आकाश भैरव(Sharabheshwar)

भगवान शंकर के षष्ठ अवतार शरभावतार का स्वरूप आधा मृग तथा शेष शरभ पक्षी (आठ पैरों वाले शेर से भी शक्तिशाली ) का था। इस अवतार में भगवान शंकर ने नृसिंह भगवान की क्रोधाग्नि को शांत किया था| भगवान शरभेश्वर की दो शक्ति- माता शूलिनी और माता प्रत्यांगिरा हैं जो भगवान के दोनो पंखो पर … Continue reading शरभावतार आकाश भैरव(Sharabheshwar)

देवीमयि

तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः। निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥ इति विचिन्त्य शिवे! शमिताशिवे! जगति जातमयत्नवशादिदम्। स्तुतिजपार्चनचिन्तनवर्जिता न खलु काचन कालकलास्ति मे॥ ——- महामाहेश्वर श्री अभिनवगुप्त ‘हे जगदम्बिके! संसार मे कौन-सा वाङ्मय ऐसा है, जो तुम्हारी स्तुति नहीं है; क्योकि तुम्हारा शरीर तो सकलशब्दमय है। है देवि! अब मेरे … Continue reading देवीमयि

श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्

श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्रम् दुर्गा सप्तशती में वर्णित सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एक अत्यंत चमत्कारिक और तीव्र प्रभाव दिखाने वाला स्तोत्र है। जो लोग पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते वे केवल कुंजिका स्तोत्र का पाठ करेंगे तो उससे भी संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का फल मिल जाता है। शिव उवाच शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् । येन … Continue reading श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्

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